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शेयर बाजार में भारी गिरावट: सेंसेक्स 582 अंक टूटा, निफ्टी 23,997 पर बंद, कच्चे तेल में उछाल से दबाव

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वैश्विक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के चलते भारतीय शेयर बाजार गिरा। सेंसेक्स 582 अंक और निफ्टी 180 अंक टूटकर बंद हुआ।

घरेलू शेयर बाजार में गुरुवार को लगातार गिरावट का सिलसिला जारी रहा और कारोबारी सत्र के अंत में बाजार पूरी तरह दबाव में आ गया। बीएसई सेंसेक्स 582.86 अंक की गिरावट के साथ 76,913.50 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 180.10 अंक टूटकर 23,997.55 के स्तर पर आ गया। पूरे दिन बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच बिकवाली का दबाव हावी रहा और निवेशकों की धारणा कमजोर दिखाई दी।

बाजार में यह गिरावट मुख्य रूप से वैश्विक दबाव और पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का परिणाम रही, जिसका सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर देखने को मिला। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल में तेज उछाल के कारण निवेशकों में चिंता बढ़ गई और इसका असर भारतीय बाजार पर भी साफ दिखाई दिया।

दिन की शुरुआत ही कमजोर रुख के साथ हुई, जहां सेंसेक्स 914.12 अंकों की भारी गिरावट के साथ 76,582.24 पर खुला और पूरे दिन अस्थिरता बनी रही। कारोबार के अंत में यह 0.75 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुआ। वहीं निफ्टी भी 278.45 अंक टूटकर 23,899.20 पर खुला और अंत में 0.74 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।

विशेषज्ञों के अनुसार बाजार में गिरावट की सबसे बड़ी वजह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में आया जबरदस्त उछाल है। ब्रेंट क्रूड (Brent Crude Oil) शुरुआती कारोबार में 121 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया, जो पिछले चार वर्षों का उच्चतम स्तर माना जा रहा है। बाद में इसमें थोड़ी गिरावट जरूर आई, लेकिन कीमतें अब भी ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं।

वहीं वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड भी 108 डॉलर के करीब पहुंच गया, जिससे वैश्विक ऊर्जा संकट और गहरा गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह स्थिति अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का परिणाम है, जहां होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अनिश्चितता ने बाजार की चिंता बढ़ा दी है।

बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक भारत जैसे आयात आधारित देश पर इसका सीधा असर पड़ता है क्योंकि कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने से आयात बिल बढ़ जाता है और रुपये पर दबाव बनता है। इसके साथ ही महंगाई बढ़ने की आशंका भी मजबूत हो जाती है।

इस बीच विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली (FII outflow) ने भी बाजार पर दबाव बढ़ाया है। मासिक एक्सपायरी के कारण भी बाजार में अस्थिरता देखी गई, जिससे गिरावट और तेज हो गई।

वैश्विक बाजारों में भी कमजोर रुख देखने को मिला, जहां एशियाई बाजारों में जकार्ता कंपोजिट, हैंग सेंग और निक्केई 225 में 1% से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। अमेरिकी बाजारों में भी मिश्रित लेकिन कमजोर प्रदर्शन रहा।

कुल मिलाकर, वैश्विक तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और निवेशकों की बिकवाली ने मिलकर भारतीय शेयर बाजार पर भारी दबाव बना दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक अंतरराष्ट्रीय हालात स्थिर नहीं होते, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।

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